आज त्यांचा जन्मदिवस आहे..
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दोन वर्षांपूर्वी सावनी सावरकरांच्या आवाजात ध्वनिमुद्रित केलेली त्यांची ही अप्रतिम गझल... #कैसे_कैसे_लोग
कैसे कैसे लोग खुशी से बिकने पर तैयार हुए
एक हम ही दीवाने निकले हम ही यहाँ पर ख़ार हुए
प्यार का बंधन ख़ून के रिश्ते टूट ख्वाबों की तरह
जागती आँखे देख रही थी क्या-क्या कारोबार हुए
आप वो स्याने रस्ते के हर पत्थर को बुत मान लिया
हम वो पागल, राहू में अपनी आप ही खुद दीवार हुए
आनेवाली सुबह गिनेगी रात के अंधे तूफाँ में
कितने साहिल ही पर डूबे कितने भँवर के पार हुए
#BasharNawaz
