डॉ.दिलीप पांढरपट्टे 'रिंद' जी की चार बेहतरीन उर्दू ग़ज़लें रेकॉर्ड की थी। उस में से 'दिन लगे है रात सा' यह ग़ज़ल पेश-ए-ख़िदमत है।समाअत फ़रमाईए...
...यह ग़ज़ल युट्युबपर सूननेके बाद पद्मश्री सुरेश वाडकरजी और मशहूर ग़ज़ल गायक रुपकुमार राठोड इन्होने मुझे व्हाट्सअपवर भेजी थी।यह प्रतिक्रियायें मेरे लिए और प्राजक्ता के लिए बहुमूल्य है...
■Attach 'din lage hai' aikla kitti chaan tune ani gayki. Kon ahe hee kanyaka. Apratim gaylay. God bless her.regards namaskar.
Apratim chal keliye tumhi nehmi pramane.
-#suresh_wadkar
■ बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल हुई है , बहुत ही अच्छी कम्पोजीशन है और लाजवाब गाया है प्राजक्ता ने मेरी ओर से हार्दिक बधाई और शुभकामना आप सभी को 💕
-#रुपकुमार_राठोड
दिन लगे है रात सा और काँटा फूल सा
ये मोहब्बत का असर है, ये नहीं कोई हादसा
अब कहाँ नग़्मे सुनाए हम बहारे इश्क मे
अब यहा ख्वाबों में आता है चेहरा चांद सा
हम पयंबर है मुहब्बत के, वफ़ा के, प्यार के
जान का दुश्मन भी लगता है हमें दिलदार सा
'रिंद' की जादुगरी का ये भी पहलू देखिए
हाथ में पानी भी ले वो तो लगे है जाम सा
ग़ज़लसरा - प्राजक्ता सावरकर शिंदे Prajakta Savarkar Shinde
मोसिकार - '#शान_ए_ग़ज़ल' सुधाकर कदम
Live -Amaravati 26/12/2024

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