ये कैसी शाम है के दिल को कुछ क़रार नहीं
छलकता जाम नहीं, कोई ग़मगुसार नहीं
दिल के बहलाने को ये बात ठीक है लेकिन
किसी फरिश्ते पे अब मेरा ऐतबार नहीं
मुझे न शौक है हरदम इसे सुनाने का
ये शायरी है मेरी, कोई इश्तिहार नहीं
तेरी इक आह पे क़ुर्बान हुयी सल्तनते
वो कौन है जो इस अदा पे जाँनिसार नहीं
गुलुकारा - प्राजक्ता सावरकर शिंदे
शायर - डॉ.दिलीप पांढरपट्टे 'रिंद'
मोसिकार - 'शान-ए-ग़ज़ल' सुधाकर कदम
तबला - पांडुरंग पवार
हार्मोनियम - रामेश्वर ताकतोडे
गिटार - विशाल रामनगरीया
निज़ामत -शाहीर सुरेशकुमार वैरालकर
Live S.M.Joshi Sabhagruh, pune.
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